चुनाव से पहले पार्टियों को बड़े झटके, कई नेताओं ने दिया इस्तीफा

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस को पहला झटका लग गया है। पार्टी के दो विधायक सुदर्शन और पूर्णिमा यादव ने कांग्रेस को अलविदा कहते हुए जदयू का दामन थाम लिया है। इनके जाने के साथ ही इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि अभी कांग्रेस के कुछ और विधायक पार्टी को अलविदा कह सकते हैं। हालांकि कांग्रेस को इन दो विधायकों के पार्टी से जाने का कोई मलाल नहीं।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद प्रेमचंद मिश्रा कहते हैं कि इनके जाने से पार्टी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। पिछले पांच साल के दौरान पार्टी की किसी गतिविधि में इन दोनों को नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि पार्टी में वफादार और संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाए।

बिहार कांग्रेस में टूट की बुनियाद उसी दिन पड़ गई थी जिस दिन पार्टी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अशोक चौधरी को आलाकमान के दबाव के बाद कांग्रेस छोड़ जदयू के साथ जाना पड़ा था। पार्टी की नीतियों से आहत डॉ. चौधरी उस वक्त अधिकांश जीते हुए विधायकों को अपने साथ लेकर जाने की रणनीति भी बना चुके थे। पर 18 विधायकों की संख्या अंत तक पूरी नहीं हो पाई। बहुत प्रयास के बाद डॉ. चौधरी के प्रस्ताव पर 15 विधायकों ने ही हस्ताक्षर किए। बाद में मजबूरी में चौधरी तीन अन्य पार्षदों के साथ कांग्रेस को छोड़ गए, मगर उनके पीछे तोडफ़ोड़ की रणनीति जारी रही, दैनिक जागरण की रिपोर्ट।

अब जबकि चुनाव सिर पर हैं ऐसे में कांग्रेस का साथ छोड़ने वाले फिर सक्रिय हो गए हैं। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि सुदर्शन और पूर्णिमा के अलावा तीन विधायक भी पार्टी छोडऩे को बेचैन हैं। जदयू जैसे ही इन्हें इशारा करेगा, पार्टी को एक और टूट से दो-चार होना पड़ेगा। प्रेमचंद मिश्रा कहते हैं जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं और जदयू के साथ जा रहे उन्हें एहसास नहीं कि वे डूबती नाव पर सवारी को गए हैं, क्योंकि जनता इस बार भाजपा-जदयू सरकार को हराने का मन बनाए बैठी है।

वहीं आरजेडी के भोला राय ने जेडीयू का दामन थाम लिया है। वहीं कांग्रेस विधायक सुदर्शन और पूर्णिमा यादव ने भी जेडीयू की सदस्यता ले ली है। इसके साथ ही उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा के प्रवक्ता अभिषेक झा भी जेडीयू में शामिल हो गए हैं। सभी ने जेडीयू की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की है, नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट।

इससे पहले आरजेडी के दिग्गज नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। गुरुवार को उनके इस्तीफे का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। रघुवंश प्रसाद के आरजेडी छोड़ने के बाद से लगातार उनके एनडीए में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। वहीं जेडीयू संसदीय दल के नेता ललन सिंह ने पहले ही कहा दिया कि अगर वे एनडीए में आते हैं तो उसका हृदय से स्वागत है।

इसके साथ ही आरजेडी के सबसे सुरक्षित और गढ़ माने जाने वाले राघोपुर के आरजेडी के पूर्व विधायक भोला राय भी जेडीयू में शामिल हो गए हैं। जेडीयू के प्रदेश कार्यालय में सांसद ललन सिंह ने सभी सदस्यों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद ललन सिंह, मंत्री अशोक चौधरी, मंत्री नीरज कुमार समेत अन्य नेताओं ने स्वागत किया है। सांसद ललन सिंह ने कहा कि सभी का जेडीयू में हार्दिक स्वागत है। भोला राय 3 बार आरजेडी के विधायक रहे हैं। भोला बाबू ने लालू यादव के लिए सीट त्याग दी थी लेकिन आरजेडी ने उन्हें अपमानित करने का काम किया है। आरजेडी की यही परम्परा रही है।

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