बिहार में पैदल चलने वालों के नीति निर्माण जरूरी।

पैदल नीति के मसौदे पर हुई चर्चा।


पैदल चलने वालों का सड़क पर पहला अधिकार है परन्तु आज उनकी स्थिति सबसे दयनीय है इसके लिए नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत देखते हुए पैदल यात्री मंच ने नीति के मसौदे पर आज चर्चा आयोजित की।

उक्त जानकारी पैदल यात्री मंच व बिहार साईकिल रिक्शा अधिकार मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में देते हुए बताया गया कि आज ज़ूम पर मीटिंग आयोजित में मसौदे पर चर्चा हुई।
आज की चर्चा का विषय प्रवेश कराते हुए संजय आनंद ने पैदल चलने वालों के लिए पूर्व में जारी अभियान से निकली पैदल नीति के मांग की बात उठायी जिसके बाद नीति का ड्राफ्ट मसौदे को महेन्द्र यादव व अविकल ने लोगों के बीच रखा। नीति में साफ सुथरे, बाधा रहित, बुनियादी सुविधाओं युक्त फुटपाथ निर्माण जिसपर विकलांग, वृद्ध, बच्चों सहित सभी पैदल यात्री आसानी से चल सकें। उनके प्रति सम्मान का नजरिया विकसित करनेऔर सड़क पार की सुरक्षित व्यस्था बनाने, इन सभी के लिए साझा फ्रेम वर्क में काम करने सहित इसके सम्बंध में दिए गए नीतिगत दिशा निर्देशों की बातें है।

इस ड्राफ्ट मसौदे पर चर्चा शुरू करते हुए बोध गया नगर परिषद उप मुख्य पार्षद प्रतिनिधि संजय यादव ने ड्राफ्ट की सराहना करते हुए इसे बोधगया में पहला प्रयोग करने के प्रयासों को रखा। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट मसौदे को और सरल संक्षेपण व आकर्षण बनाया जाए। चर्चा को आगे बढ़ाते हुए फादर अन्टो ने वृद्ध लोगों के लिए सुविधाओं को और प्रमुखता से रखने की बात की। वहीं चंपारण के सिद्धार्थ, गोपालगंज के फणीन्द्र कुमार ने क्षेत्रीय स्तर पर कार्यक्रम कर इसके लिए अभियान तेज करने का सुझाव दिया। प्रतिमा पासवान ने महिलाओं की स्थिति पर चर्चा की तो मधेपुरा के सतीश, सुपौल से इंद्रजीत, सादाब, मुंगेर से अभिनन्दन, पटना के शौकत व एकवोकेट मणिलाल, ऋषि आनंद ने पैदल चलने की दिक्कतों को उल्लेख करते हुए ड्राफ्ट मसौदे की सराहना की। कार्यक्रम में कारू जी, रोहित आर्यन, हृदय कुमार, अरविंद, अर्जुन सिंह सहित 15 जिलों के लोगों ने अपनी बातें रखी। राजेन्द्र रवि ने पूरी चर्चा के महत्वपूर्ण मुद्दों को चिन्हित कर आगे की क्षेत्रीय रणनीति बनाने पर बल दिया । मीटिंग की अध्यक्षता आईआईटी दिल्ली के शोधार्थी निशान्त ने किया।